गांधी वध और मैं | Gandhi vadh aur mai

By: गोपाल गोडसे - Gopal Godse


दो शब्द :

यह पाठ गोपाल विनायक गोडसे द्वारा लिखा गया है, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी के वध की घटना और उसके पीछे के कारणों का विश्लेषण किया है। लेखक स्पष्ट करते हैं कि वे किसी राजनीतिक विचारधारा के समर्थक नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अपनी दृष्टि से घटनाओं को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। गोडसे ने गांधी जी के वध को केवल एक हत्या के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे एक गहरे राजनीतिक संदर्भ में रखकर समझाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि गांधी जी के विचारों और उनके मुस्लिम समुदाय के प्रति दृष्टिकोण ने देश के विभाजन का कारण बना, जिससे कई लोगों की जानें गईं। गोडसे ने यह भी कहा कि उनका और उनके सहयोगियों का कृत्य एक प्रकार की प्रतिक्रिया थी, जो उस समय की राजनीतिक अस्थिरता और गांधी जी के कार्यों के प्रति उनकी असहमति से उत्पन्न हुई थी। लेखक ने यह स्वीकार किया कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, परंतु वे अपने कार्य के पीछे के कारणों को स्पष्ट करना चाहते थे। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उनकी पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और फिर न्यायालय ने उसे मुक्त किया। गोडसे का यह ग्रंथ न केवल गांधी के वध की घटना का विवरण देता है, बल्कि यह उस समय की राजनीति, सामाजिक स्थिति और उन विचारों की भी चर्चा करता है जो उस समय प्रचलित थे। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से यह बताने की कोशिश की है कि इतिहास को बिना किसी पक्षपात के समझना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ सही जानकारी प्राप्त कर सकें। अंत में, गोडसे ने यह भी कहा कि समय के साथ सभी व्यक्ति और घटनाएँ भुला दी जाएँगी, लेकिन इतिहास के पन्नों में उन घटनाओं का उल्लेख रहेगा, जो मानवता के लिए एक पाठ के रूप में काम करेगा।


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