बीजक मूल | Bijak Mool

- श्रेणी: दोहे /dohas साहित्य / Literature
- लेखक: कबीरदास - Kabirdas
- पृष्ठ : 201
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1935
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दो शब्द :
इस पाठ में संत कबीर की शिक्षाओं और उनके विचारों का सार प्रस्तुत किया गया है। कबीर ने मानवता, धर्म, और आपसी भाईचारे पर जोर दिया है। उन्होंने जाति, धर्म और समाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और सभी को एक समान मानने की बात की। उनका कहना है कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता की सेवा करे और सभी को एकता के सूत्र में बांधे। कबीर के बीजक में उन्होंने मानवता की मूल चेतना, आत्मा के महत्व, और भक्ति के मार्ग को समझाया है। वे कहते हैं कि आत्मा राम है और मन माया के द्वारा भ्रमित है। उन्होंने यह भी कहा है कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए संतों की संगति जरूरी है। कबीर ने समझाया कि भक्ति और दया का महत्व है, और यह आवश्यक है कि हम अपने हृदय को शुद्ध रखें। संत कबीर ने यह भी बताया कि सभी जीव-जंतुओं पर दया करना और उनके प्रति करुणा रखना ही असली धर्म है। उन्होंने हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदायों को एक समान मानते हुए भेदभाव मिटाने की आवश्यकता पर बल दिया। कबीर का संदेश है कि हमें अपने कर्मों और विचारों में शुद्धता लानी चाहिए और सच्चे ज्ञान की खोज में लगे रहना चाहिए। इस प्रकार, कबीर की शिक्षाएँ हमें एकजुटता, प्रेम और मानवता की सेवा का मार्ग दिखाती हैं। उनका जीवन और विचार हमें यह सिखाते हैं कि असली धार्मिकता और मानवता का अर्थ क्या है।
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