गंधमादन | Gandhamadan

By: कुवेरनाथ राय - Kuvernath Ray


दो शब्द :

"गन्धमादल" नामक इस पाठ में लेखक कुबेरनाथ राय ने शब्द और भाषा के महत्व को गहराई से समझाया है। उन्होंने व्याकरण को भाषा का "पुलिसमैन" कहा है, जो भाषा के नियमों का पालन करवाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि शब्दों की शक्ति और उनका प्रभाव व्याकरण के बंधनों से परे है। शब्दों का उपयोग कैसे किया जाए, यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रयोग के माध्यम से ही शब्दों में जीवन और ऊर्जा आती है। लेखक ने यह तर्क किया है कि भारतीय समाज ने कर्मकांड और नियमों को अधिक महत्व दिया है, जिससे लोग भावनाओं और अभिव्यक्ति के वास्तविक अर्थ को भूल गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि व्यक्ति का नाम और पहचान उसके अस्तित्व का आधार होते हैं, और यह नाम ही है जो किसी व्यक्ति को विशिष्टता प्रदान करता है। इस पाठ में, लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि एक विकसित भाषा और शब्दों की उपलब्धता व्यक्ति को मानसिक, नैतिक और आत्मिक दृष्टि से समृद्ध बनाती है। उन्होंने शब्दों के प्रयोग को अनुभवों को स्पष्ट करने का एक साधन माना है, जो समाज को जागरूक और प्रेरित करता है। संक्षेप में, यह पाठ भाषा, शब्दों और उनके अनुभवों के गहरे संबंध को दर्शाता है।


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