तीन नाटक | Teen Natak

By: सेठ गोविन्ददास - Seth Govinddas
तीन नाटक | Teen Natak by


दो शब्द :

इस पाठ में गोविन्ददास द्वारा लिखित नाटकों का संक्षिप्त विवरण और उनके लेखन का संदर्भ प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने जेल में रहते हुए नाटकों की रचना की, जिसमें एक पौराणिक, एक ऐतिहासिक और एक सामाजिक नाटक शामिल हैं। बचपन से ही नाटकों के प्रति उनकी रुचि थी, जिससे उन्होंने विभिन्न भाषाओं के नाटक पढ़े और देखे। लेखक ने ललित कला के महत्व को समझाया है, जिसमें वह इसे मानव जीवन का सर्वोत्तम रूप मानते हैं। उन्होंने कला को प्राकृतिक और कृत्रिम विभागों में बांटा है, जहाँ कृत्रिम कला को विज्ञान और ललित कला में विभाजित किया गया है। ललित कला को आनंद और भावनाओं के संचार का माध्यम माना गया है, जिसमें काव्य-कला को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। लेखक ने कला के उद्देश्य पर भी विचार किया है, जहाँ एक पक्ष इसे केवल मनोरंजन का साधन मानता है, जबकि दूसरा इसे उपदेश देने का माध्यम मानता है। उन्होंने विभिन्न विद्वानों के विचारों का संदर्भ देते हुए कला के महत्व को दर्शाया है। उनके अनुसार, कला जीवन का स्रोत है और इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहराई से विचारों की उत्पत्ति करना भी है। पाठ में कला के निर्माण की प्रक्रिया और उसके विभिन्न प्रकार के कलाकारों का उल्लेख किया गया है। लेखक ने यह भी बताया कि उत्कृष्ट कला वह है जो हृदय में महान विचारों को उत्पन्न करती है। कुल मिलाकर, पाठ में नाटक, ललित कला और उसके महत्व को विस्तृत रूप से समझाया गया है।


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