सुन्दर ग्रन्थावली | Sundar Granthvali

- श्रेणी: Tika /टीका ग्रन्थ / granth दोहे /dohas
- लेखक: संतकवि कविरत्न स्वासी नारायरादास - Santkavi Kaviratn Swami Narayan das
- पृष्ठ : 582
- साइज: 19 MB
- वर्ष: 1989
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दो शब्द :
इस पाठ में संत कवि छोटे सुन्दरदासजी के बारे में जानकारी दी गई है, जो संतप्रवर दादजी के छोटे और योग्य शिष्य थे। छोटे सुन्दरदासजी ने अपनी काव्य प्रतिभा के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और सरलता को एकत्रित करते हुए 42 ग्रंथों की रचना की। उनकी काव्य शैली मधुर, सरल और सरस है, जो पाठकों को आकर्षित करती है। सुन्दरदासजी की रचनाएँ विभिन्न प्रकार के छंदों में हैं और उनके काव्य में भक्ति का गहराई से समावेश है। उनकी रचनाएँ शात्त रस प्रधान होती हैं और इनमें ज्ञान एवं वैराग्य के गूढ़ अर्थ भी शामिल हैं। पाठ में उल्लेख किया गया है कि उनकी रचनाएँ न केवल सुन्दर हैं, बल्कि वे भक्तों और ज्ञानी जनों के हृदय में गहरी छाप छोड़ती हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि सुन्दरदासजी की रचनाएँ साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और उनकी सरल भाषा में गहन विचार व्यक्त किए गए हैं। उन्होंने गम्भीर विषयों को भी सरलता से प्रस्तुत किया है, जिससे आम जन भी उन्हें आसानी से समझ सके। अंत में, यह भी उल्लेख किया गया है कि सुन्दरदासजी की रचनाएँ सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्य रखती हैं, और उनका काव्य साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी काव्य रचनाएँ आज भी पाठकों के लिए प्रेरणा और ज्ञान का स्रोत बनी हुई हैं।
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