प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास | Prachin Bhartiya Prampara aur Itihas

By: रांगेय राघव - Rangaiya Raghav रांगेय राघव - Rangeya Raghav


दो शब्द :

प्राचीन भारतीय इतिहास और परंपरा का अध्ययन एक व्यापक विषय है, जिसमें विभिन्न जातियों, संस्कृतियों और उनके विकास का विवरण प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने प्रागैतिहासिक भारत से लेकर आर्य सभ्यता तक के सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परिवर्तनों पर प्रकाश डाला है। प्राचीन भारत का इतिहास कई जातियों के आगमन और उनके सामाजिक ढांचे के विकास के बारे में बताता है। प्रारंभ में आदिम साम्यवाद का रूप देखा गया, जिसे बाद में पितृसत्तात्मक व्यवस्था ने बदल दिया। द्रविड़ जातियों का आगमन भी महत्वपूर्ण था, जिन्होंने उत्तर-पश्चिम भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और स्थानीय जनसंख्या के साथ घुल-मिल गए। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत में जातिभेद और वर्गभेद का विकास कैसे हुआ। आर्यों का आगमन और उनके युद्ध तथा कृषि में विकास ने सामाजिक संरचना में बदलाव लाया। दासप्रथा का प्रचलन भी इसी समय के दौरान हुआ। इतिहास में प्राकृतिक आपदाओं, जैसे महाप्रलय, ने भी सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित किया। विभिन्न जातियाँ, जैसे हब्शी, निषाद, द्रविड़, और आर्य, ने भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि प्राचीन काल में सामाजिक स्तरों के आधार पर जातियों का विकास हुआ। इस प्रकार, प्राचीन भारतीय समाज का अध्ययन केवल एक जाति या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न जातियों, उनकी धार्मिक मान्यताओं, और सामाजिक व्यवस्थाओं के समग्र विकास के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी प्राचीन भारतीय समाज को समझने के लिए कई पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि इतिहास की सही तस्वीर प्रस्तुत की जा सके। इस प्रकार, लेखक ने प्राचीन भारतीय इतिहास की जटिलता और विविधता को उजागर किया है, जो इसे अध्ययन का एक समृद्ध क्षेत्र बनाता है।


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