योग रहस्य | Yog Rahasya

- श्रेणी: योग / Yoga साहित्य / Literature
- लेखक: माहेश्वरी प्रसाद दुबे - Maheshwari Prasad Dubey
- पृष्ठ : 214
- साइज: 4 MB
- वर्ष: 1939
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दो शब्द :
यह पाठ "योग" के महत्व और उसकी विशेषताओं के बारे में है, जिसमें विभिन्न विद्वानों और ऋषियों के दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया गया है। प्रकाशक ने इस पुस्तक को पाठकों के लिए समर्पित किया है और इसे योग के गहन अध्ययन और समझ के लिए अत्यंत उपयोगी बताया है। पुस्तक में योग की परिभाषा और उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। महर्षि पतंजलि की परिभाषा के अनुसार, योग का अर्थ चित्त की वृत्तियों का निरोध करना है। इसके साथ ही, योग की आवश्यकता, इसकी विधियाँ और इसके माध्यम से आत्मा की गहन समझ को भी उजागर किया गया है। पाठ में यह भी बताया गया है कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह आत्मा और शरीर के बीच संतुलन स्थापित करने की एक प्रक्रिया है। पुस्तक में अष्टांग योग के आठ अंगों का भी उल्लेख किया गया है, जो योग की विभिन्न विधियों को दर्शाते हैं। इसके अलावा, पाठ में ध्यान, समाधि, और चित्त की वृत्तियों के निरोध के महत्व पर जोर दिया गया है। अंत में, यह पुस्तक आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत की गई है, जिसमें पाठक को अपने भीतर की अद्वितीय शक्तियों को पहचानने और विकसित करने का अवसर दिया गया है। पाठ का मुख्य उद्देश्य योग के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझना और आत्मा के परम सुख की प्राप्ति करना है।
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