अभिनव संगीत शिक्षा प्रथम भाग | Abhinav Sangeet Sikhsha part 1

By: श्री ना. रातजंकर - Shree Na. Ratjankar
अभिनव संगीत शिक्षा प्रथम भाग   | Abhinav Sangeet Sikhsha part 1 by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: इस पाठ में भारतीय संगीत शिक्षा के महत्व और उसकी परंपराओं पर चर्चा की गई है। लेखक ने संगीत शिक्षा के लिए केवल शैक्षणिक पाठ्यक्रम या थ्योरी पर निर्भर रहने की सीमाओं को उजागर किया है। पहले संगीत शिक्षा गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से होती थी, जिसमें प्रत्यक्ष प्रशिक्षण का महत्व था, लेकिन वर्तमान में छात्रों की संख्या और विभिन्न परिस्थितियों के कारण यह प्रणाली चुनौतीपूर्ण हो गई है। लेखक ने इस बात पर जोर दिया है कि संगीत शिक्षा में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों का संतुलित होना आवश्यक है। उन्होंने एक नई पाठ्य पुस्तक "अभिनव संगीत शिक्षा" का निर्माण किया है, जो सरल रागों और लय पर केंद्रित है, ताकि छात्रों को संगीत की आधारभूत शिक्षा दी जा सके। इस पुस्तक में विभिन्न रागों, स्वर, ताल और संगीत के नियमों को समझाने के लिए पाठ तैयार किए गए हैं, ताकि शिक्षक और छात्र आसानी से सीख सकें। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि संगीत शिक्षा के लिए पाठ्य पुस्तकें अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं, क्योंकि सीधे गुरु से शिक्षा प्राप्त करना कठिन हो गया है। कुल मिलाकर, यह पाठ भारतीय संगीत शिक्षा के विकास, इसके वर्तमान संदर्भ और एक व्यवस्थित पाठ्यक्रम के निर्माण की आवश्यकता पर जोर देता है, ताकि संगीत की इस समृद्ध कला को नए छात्रों तक पहुंचाया जा सके।


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