वेणीसंहार - नाटकम | Venisamhar -Natakam

- श्रेणी: नाटक/ Drama साहित्य / Literature
- लेखक: श्री भट्टनारायण - Shree Bhattnarayan श्री भट्टनारायण - Shri Bhattnarayan
- पृष्ठ : 355
- साइज: 13 MB
- वर्ष: 1902
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दो शब्द :
यह पाठ "वेणीसंहार" नामक नाटक का एक अंश है, जिसमें प्रमुख रूप से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके द्वारा राधिका के प्रति प्रेम का वर्णन किया गया है। नाटक की कथा यमुना के तट पर स्थित है, जहां श्रीकृष्ण राधा के साथ रास खेलने का प्रयास कर रहे हैं। राधिका, जिन्हें राधा रानी भी कहा जाता है, श्रीकृष्ण की प्रेमिका हैं और उनके चरणों के स्पर्श से उनका मन प्रसन्न हो जाता है। पाठ में यह दर्शाया गया है कि कैसे राधिका का मन श्रीकृष्ण की ओर आकृष्ट होता है, जबकि वह पहले अप्रसन्न होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण उनकी ओर आकर्षित होते हैं और उनका प्रेम उन्हें आनंदित करता है। इसके अलावा, नाटक में विभिन्न देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष का भी उल्लेख है, जिसमें भगवान विष्णु अपनी मुस्कान और करुणा के साथ असुरों को नियंत्रित करते हैं और देवताओं की रक्षा करते हैं। इस नाटक की भाषा संस्कृत है, जिसमें भावनाओं, प्रेम, और आध्यात्मिकता का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत किया गया है। नाटक में धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ भी हैं, जो भारतीय साहित्य की गहराई और विविधता को दर्शाते हैं। कुल मिलाकर, यह पाठ भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें प्रेम, भक्ति, और संघर्ष की कहानियों का समावेश है।
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