मालविकाग्निमित्रम | Malvikagnimitram

- श्रेणी: धार्मिक / Religious नाटक/ Drama संस्कृत /sanskrit
- लेखक: कालिदास - Kalidas
- पृष्ठ : 168
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1870
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दो शब्द :
"मालविकाग्निसित्र" नाटक कालिदास द्वारा रचित एक अद्वितीय काव्य है, जिसमें प्रेम, राजनीति और मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण किया गया है। यह नाटक मुख्यतः मालविका और अग्निसीत्र के प्रेम के इर्द-गिर्द घूमता है। कथानक की शुरुआत एक राजकुमार की प्रेम कहानी से होती है, जिसमें वह अपनी प्रेमिका मालविका को पाने के लिए विभिन्न संघर्षों का सामना करता है। नाटक में प्रमुख पात्रों में राजा, विदूषक, और अन्य दरबारी शामिल हैं, जो कथानक को जीवंत बनाते हैं। नाटक का संदेश यह है कि सच्चा प्रेम और समर्पण हर बाधा को पार कर सकता है। कथा में कई मोड़ और घटनाएँ हैं, जो दर्शाते हैं कि कैसे प्रेम और निष्ठा अंततः विजय प्राप्त करते हैं। नाटक का अंत सुखद है, जिसमें प्रेमी युगल एक-दूसरे के साथ मिल जाते हैं। इस नाटक में कालिदास ने अपने संवादों और वर्णनों के माध्यम से न केवल प्रेम की गहराई को प्रस्तुत किया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संदर्भों को भी जोड़कर एक समृद्ध कथा का निर्माण किया है। "मालविकाग्निसित्र" न केवल एक नाटक है, बल्कि यह प्रेम और मानव संबंधों का एक गहन अध्ययन भी है।
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