श्री राम चरित मानस | Shree Ram Charit Manas

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious
- लेखक: गोस्वामी तुलसीदास - Goswami Tulsidas
- पृष्ठ : 1237
- साइज: 699 MB
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दो शब्द :
यह पाठ रामचरितमानस के संदर्भ में है, जिसमें इसके पहले और दूसरे संस्करण के प्रकाशन की चर्चा की गई है। रामनरेश त्रिपाठी ने इसे टीका सहित प्रकाशित किया था, जो रामचरितमानस की प्रसिद्धि को बढ़ाने में सहायक रहा। पाठ में बताया गया है कि तुलसीदास के काव्य का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा है और उनकी रचनाएँ मानवता के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इसके बाद, कवि माघ की कथा प्रस्तुत की गई है, जिसमें उनकी दानशीलता और आत्मघात का उल्लेख है। यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने दान के कार्य में इतना समर्पण किया कि अंततः उन्होंने आत्महत्या कर ली। इस संदर्भ में कवि की विद्वता और समाज के प्रति उनकी निष्ठा को रेखांकित किया गया है। तुलसीदास को एक महान कवि के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो केवल बाहरी शत्रुओं से नहीं, बल्कि आंतरिक विकारों जैसे मोह, मद और मत्सर से भी लड़ते हैं। उनकी काव्य रचनाएँ न केवल भक्तिभाव को उजागर करती हैं, बल्कि समाज के समस्त मानसिक और प्राकृतिक अनुभवों को भी प्रस्तुत करती हैं। पाठ में तुलसीदास के जीवन और संघर्षों का भी उल्लेख है, जो उनकी भक्ति और मानवता के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाता है। अंत में, यह कहा गया है कि तुलसीदास की कृतियाँ आज भी समाज में एक प्रेरणा स्रोत हैं और उनकी रचनाओं में भक्ति का एक अनूठा स्वरूप मिलता है।
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