हिंदी मुहावरा - कोष | Hindi Muhavara - Kosh

- श्रेणी: भाषा / Language हिंदी / Hindi
- लेखक: आर जे सरहिंदी - R J SIRHINDI
- पृष्ठ : 558
- साइज: 25 MB
- वर्ष: 1940
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने मुहावरों के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया है कि मुहावरे किसी भी भाषा की जीवंतता का प्रतीक होते हैं और ये जनसामान्य की संपत्ति होते हैं। मुहावरे भाषा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनके बिना भाषा की सजीवता कम हो जाती है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि मुहावरों की सहायता से भाषा पर अधिकार प्राप्त किया जा सकता है, और ये भाषा की गहराई और प्रभाव को बढ़ाते हैं। लेखक ने हिंदी और उर्दू के मुहावरों की तुलना की है, यह बताते हुए कि दोनों भाषाओं में मुहावरे एक समानता दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि मुहावरे सभी वर्गों के लोगों की बोलचाल का हिस्सा हैं, और ये अपढ़ लोगों में भी प्रचलित हैं। मुहावरे न केवल संवाद को सरल बनाते हैं, बल्कि साहित्य और कविता में भी उनकी विशेष भूमिका होती है। लेखक ने यह भी बताया है कि हिंदी में मुहावरों की संख्या काफी अधिक है, और उनकी पुस्तक में हजारों मुहावरे शामिल किए गए हैं। मुहावरे केवल अर्थ देने के लिए नहीं, बल्कि उनके प्रयोग के लिए भी दिए गए हैं। लेखक ने यह सुझाव दिया है कि मुहावरे अध्ययन करके कोई भी व्यक्ति भाषा पर अच्छी तरह से अधिकार प्राप्त कर सकता है। अंत में, लेखक ने प्रकाशक को धन्यवाद दिया और पाठकों से अनुरोध किया कि वे उनकी पुस्तक के माध्यम से मुहावरे के महत्व को समझें और उनका उपयोग करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुहावरे किसी भी भाषा के खजाने की कुंजी हैं।
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