भारतीय ज्योतिष का इतिहास | Bhartiya jyotish Ka Itihas

By: गोरख प्रसाद - Gorakh Prasad
भारतीय ज्योतिष  का इतिहास | Bhartiya jyotish Ka Itihas by


दो शब्द :

भारतीय ज्योतिष का इतिहास एक समृद्ध और दीर्घकालिक परंपरा है, जिसका अध्ययन प्राचीन काल से किया जाता रहा है। इस पुस्तक में ज्योतिष के इतिहास और विकास को सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है, ताकि पाठक इसे आसानी से समझ सकें। लेखक गोरख प्रसाद ने ज्योतिष के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया है कि यह न केवल खगोल विज्ञान का हिस्सा है, बल्कि कृषि, धार्मिक अनुष्ठानों और दैनिक जीवन में भी इसकी आवश्यकता होती है। प्राचीन काल में मनुष्य ने समय की माप के लिए विभिन्न एकाइयों का उपयोग शुरू किया। दिन, रात, महीने और वर्ष की अवधारणाओं ने ज्योतिष के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऋग्वेद और अन्य प्राचीन ग्रंथों में ज्योतिष के संकेत मिलते हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि उस समय भी ज्योतिष का ज्ञान व्यापक था। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि समय के साथ-साथ मानव समाज में ज्योतिष की आवश्यकताएँ बढ़ने लगीं, जिससे ज्योतिष की विधि और सिद्धांतों का विकास हुआ। विभिन्न ऋतुओं के क्रम और चंद्रमा की अवस्थाओं का अध्ययन करके, प्राचीन ज्योतिषियों ने कैलेंडर प्रणाली विकसित की, जो आज भी उपयोग में लाई जाती है। इस पुस्तक में भारतीय ज्योतिष के इतिहास, विभिन्न विद्वानों, और उनके योगदान का भी उल्लेख है, जो इस ज्ञान को समृद्ध बनाने में सहायक रहे हैं। लेखक ने सरलता से विभिन्न तकनीकी शब्दों को समझाने का प्रयास किया है, ताकि ज्योतिष में रुचि रखने वाले नये पाठक भी इस ज्ञान का लाभ उठा सकें। कुल मिलाकर, यह पुस्तक भारतीय ज्योतिष के व्यापक इतिहास, उसके विकास और महत्व को दर्शाती है, और पाठकों को एक गहरी समझ प्रदान करती है।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *