मध्य एशिया का इतिहास खंड -१ | Madhya Asia ka Itihas khand -2

- श्रेणी: इतिहास / History समकालीन / Contemporary
- लेखक: राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan
- पृष्ठ : 594
- साइज: 19 MB
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दो शब्द :
यह पाठ महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा लिखित "मध्यएसिया का इतिहास" नामक पुस्तक के पहले खंड का प्रकाशन और इसके महत्व को दर्शाता है। इस ग्रंथ का उद्देश्य मध्य एशिया के इतिहास की कमी को पूरा करना है, जो भारतीय इतिहास से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। लेखक ने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक घटनाओं का अध्ययन किया है और यह दर्शाया है कि भारतीय इतिहास में मध्य एशिया के विभिन्न जातियों और सभ्यताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुस्तक का प्रकाशन बिहार-राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा किया गया है, और इसे हिन्दी साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान माना गया है। लेखक ने अपनी यात्राओं और अनुसंधानों के आधार पर इस पुस्तक की सामग्री तैयार की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि मध्य एशिया का इतिहास भारतीय इतिहास के समझने में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई ऐतिहासिक घटनाएँ और जनजातियाँ इस क्षेत्र से भारत में आई हैं। पुस्तक में उच्चारण की समस्या, सामग्री का संग्रहण, और प्रकाशन की चुनौतियों का भी उल्लेख है। लेखक ने बताया कि उन्होंने कई विद्वानों से मिलने और उनके ज्ञान का लाभ उठाने का प्रयास किया है। अंत में, यह पुस्तक न केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह है, बल्कि यह हिन्दी साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और भविष्य में ऐतिहासिक शोध के लिए भी सहायक सिद्ध होगी।
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