यागवलक्यस्मृति | Yagyavalkya Smriti

- श्रेणी: ग्रन्थ / granth धार्मिक / Religious संस्कृत /sanskrit
- लेखक: पंडित मिहिरचंद्र - Pandit Mihirchandra
- पृष्ठ : 724
- साइज: 60 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में भाषा और शिक्षा के महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक यह बताते हैं कि भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि यह ज्ञान और संस्कृति के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पंडितों और विद्वानों का उल्लेख करते हुए, लेखक ने बताया कि भाषाई ज्ञान से व्यक्ति को समाज में विशेष स्थान मिलता है, और यह ज्ञान व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में सहायक होता है। इसके अलावा, पाठ में उपाध्याय और ऋत्विक जैसे विभिन्न शिक्षण प्रवर्तकों का उल्लेख है, जो वेदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग ब्रह्मचर्य है, जो व्यक्ति को ज्ञान और आत्म-नियंत्रण के लिए आवश्यक है। पाठ में विवाह और यज्ञोपवीत के संस्कारों का भी वर्णन है, जिसमें बताया गया है कि विवाह के समय कन्या और वर की विशेषताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। शिक्षा, संस्कार और धर्म की महत्वपूर्णता को समझाते हुए, पाठ यह दर्शाता है कि ये सभी तत्व व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंत में, लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला है कि शिक्षा, भाषा, संस्कार और धर्म का समुचित समन्वय व्यक्ति को समृद्ध और सफल जीवन जीने में मदद करता है।
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