जीवन एक नाटक | Jivan ek Natak

- श्रेणी: नाटक/ Drama साहित्य / Literature
- लेखक: पन्नालाल पटेल - Pannalal Patel रघुवीर चौधरी - Raghuveer Chaudhary
- पृष्ठ : 258
- साइज: 13 MB
- वर्ष: 1970
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दो शब्द :
जीवन एक नाटक की भूमिका में पन्नालाल पटेल के कथा लेखन का महत्व दर्शाया गया है। पटेल को कथाकार के रूप में पहचाना गया है, और उनकी रचनाएं समाज और व्यक्तिगत वेदना को जोड़ने वाली हैं। उन्होंने 'मानवीनी भवाई' नामक उपन्यास के माध्यम से एक नई दिशा की शुरुआत की है, जिसमें ग्रामीण समाज और काल का प्रभाव मुख्य रूप से चित्रित किया गया है। यह उपन्यास कालू नामक पात्र के माध्यम से गुजरात के गांवों की जीवनधारा को उजागर करता है। पटेल की कथा कला में व्यक्तिवाद के बजाय सामाजिक संदर्भ महत्वपूर्ण बनते हैं। वे यह बताते हैं कि कैसे व्यक्तिगत दुखों को सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। उपन्यास में कालू का चरित्र निर्भीकता और सच्चाई का प्रतीक है, जो अपने परिवार और गांव के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाता है। उसका जीवन संघर्ष, दुख और सुख की कहानी है, जो उसे अपने समाज के अन्य पात्रों से जोड़ता है। उपन्यास में समकालीन समाज की कई समस्याओं को उजागर किया गया है, जैसे आर्थिक विषमताएं, व्यक्तिगत संघर्ष और सामाजिक ताने-बाने। पटेल ने यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे एक व्यक्ति की कहानी सृष्टि के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण बन जाती है। उनकी लेखनी में कला का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत अनुभवों को व्यक्त करना नहीं, बल्कि उन्हें एक विशाल सामाजिक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करना है। पटेल के अनुसार, महान कृतियाँ तब ही सफल होती हैं जब वे व्यक्तिगत दुखों को लेकर सृष्टि के व्यापक सुख-दुख का चित्रण करती हैं। इस प्रकार, 'जीवन एक नाटक' न केवल एक कहानी है, बल्कि यह जीवन की गहरी समझ और सामाजिक संरचना पर विचार करने का एक माध्यम है।
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