हिन्दू धर्म रहस्य | Hindu Dharm Rahasya

- श्रेणी: धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: अचलराम - Achalram
- पृष्ठ : 243
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1927
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: लेखक खाप्ती अचलराम ने इस पाठ में हिंदू धर्म के महत्व और इसके प्रचार की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने यह बताया है कि जहां सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता, वहां दीपक का प्रकाश भी व्यर्थ है। इसका तात्पर्य यह है कि जब तक धार्मिक शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश नहीं होगा, तब तक समाज को सही दिशा नहीं मिल सकेगी। लेखक ने यह भी कहा है कि परमात्मा, जो सृष्टि का पालन और संहार करता है, हमें शुभ बुद्धि प्रदान करे। उन्होंने सभी को प्रेरित किया है कि वे धर्म वृद्धि और लोकहित के कार्यों में एकजुट हों। पाठ में धार्मिक शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि बच्चों को अपने धर्म का सही ज्ञान हो और वे अपने पूर्वजों की परंपराओं को जान सकें। अचलराम ने उल्लेख किया है कि यदि हिंदू लोग अपनी बेटियों को धार्मिक शिक्षा देते और उन्हें प्रेरित करते, तो समाज में दुराचार की घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि धार्मिक बल और संगठन ही किसी जाति की पहचान और उसकी शक्ति का आधार होते हैं। यदि जाति अपने धर्म की अनदेखी करती है, तो वह धीरे-धीरे विलीन हो जाती है। पाठ में यह भी बताया गया है कि वर्तमान में हिंदू माता-पिता अपने बच्चों को पहले ही स्कूलों में भर्ती कर देते हैं, जिससे बच्चों में हिंदू संस्कृति का ज्ञान नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि बच्चों को पहले धार्मिक शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि वे अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूक रहें। अंत में, लेखक ने यह अपेक्षा की है कि सभी हिंदू जाति धार्मिक शिक्षा को प्राथमिकता दें और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करें, ताकि वे अपने गौरव को पहचान सकें और अपनी पहचान को बनाए रख सकें।
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