नैतिक शिक्षा | Naitik Shiksha

- श्रेणी: शिक्षा / Education
- लेखक: तनसुखराम गुप्त - Tanasukharam Gupt
- पृष्ठ : 130
- साइज: 1 MB
- वर्ष: 1968
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दो शब्द :
इस पाठ का मुख्य विषय नैतिक शिक्षा है। इसमें बताया गया है कि नेतृत्व, साहस और देशभक्ति जैसे गुणों का विकास कैसे किया जा सकता है। नेतृत्व का अर्थ है मार्गदर्शन करना, जो हर जगह आवश्यक है। माता-पिता, शिक्षक और खेल के कप्तान सभी किसी न किसी रूप में नेतृत्व करते हैं। नेतृत्व की शिक्षा कक्षा में और खेल के मैदान में प्रदान की जा सकती है, जहां छात्रों को सामूहिक कार्य और एकता का अनुभव होता है। साहस को हिम्मत का प्रतीक माना गया है, जो जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देता है। साहसी व्यक्ति अपने डर को पार कर सफलता की ओर बढ़ता है। साहस का उदाहरण इतिहास में अनेक वीरों के कार्यों से मिलता है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी निडर रहते हैं। देशभक्ति का अर्थ है अपने देश के प्रति सेवा और समर्पण। यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, क्योंकि देश की संस्कृति और संसाधनों से हमारा विकास होता है। महान कवियों और नेताओं ने देश की सेवा को सर्वोपरि बताया है। इस प्रकार, नैतिक शिक्षा के अंतर्गत ये गुण हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और हमें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
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