भारत कथा | Bharat Katha

By: राजगोपालाचार्य्य - Rajagopalachari
भारत कथा | Bharat Katha by


दो शब्द :

महाभारत, जिसे महामुनि व्यास ने रचा है, एक महान भारतीय महाकाव्य है जो न केवल कथा कहता है बल्कि जीवन की गहरी शिक्षाएँ भी प्रदान करता है। इस पुस्तक का अनुवाद प्रो. सोमसुंदरम ने किया है, जो इसे रोचक और सजीव तरीके से प्रस्तुत करते हैं। महाभारत की कथाएँ केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं, बल्कि इनमें जीवन के मूल्य और नैतिक शिक्षाएँ समाहित हैं। महाभारत की कथा के प्रचार-प्रसार का श्रेय भगवान व्यास को जाता है, जिन्होंने ब्रह्मा की प्रेरणा से इसे लिखने का निश्चय किया। व्यास ने गणेशजी को अपना सहायक चुना, जिन्होंने उनकी बातें लिखीं। यह कथा विभिन्न ऋषियों के माध्यम से मानवता में फैली और अंततः राजा जनमेजय के यज्ञ में सूतजी द्वारा सुनाई गई। कथा में पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध, उनके परिवार, संबंध और संघर्ष का वर्णन है। पांडवों के पांच भाई, युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव, अपने पिता की मृत्यु के बाद अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं। भीष्म पितामह, जो कि एक महान योद्धा हैं, परिवार के बीच के द्वंद्व को सुलझाने का प्रयास करते हैं, लेकिन अंततः युद्ध का मार्ग प्रशस्त होता है। महाभारत में न केवल युद्ध की कथा है, बल्कि इसमें धर्म, कर्म, नीतिशास्त्र और मानव संबंधों की गहराई भी है। इस महाकाव्य के माध्यम से पाठकों को ज्ञान, शांति और आपसी प्रेम की सीख मिलती है। यह पुस्तक सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी है और इसे बार-बार पढ़ने की आवश्यकता है ताकि इसकी गहराई को समझा जा सके। महाभारत की कथाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थीं, और ये मानवता को एकता, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।


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