युवा संसद का संचालन | Yuva Sansad ka Sanchalan

- श्रेणी: शिक्षा / Education
- लेखक: दिवाकर सी. गुले - Divakar C. Gule
- पृष्ठ : 89
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1987
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दो शब्द :
इस पाठ में युवा संसद के संचालन की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा की गई है। इसे लोकतंत्र के मूल्यों और प्रक्रियाओं के ज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना गया है, जो युवाओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने में मदद करता है। पाठ में बताया गया है कि शिक्षा के दौरान छात्रों को न केवल पाठ्यपुस्तकों से, बल्कि लोकतांत्रिक गतिविधियों और प्रक्रियाओं से भी अवगत कराना चाहिए, ताकि वे भविष्य में एक सक्षम नागरिक बन सकें। भारत में लोकतंत्र की परंपरा की चर्चा करते हुए, यह बताया गया है कि प्राचीन भारत में भी गणतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अस्तित्व था। वर्तमान में, भारतीय संविधान ने एक लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की स्थापना की है, जो जनता की सहमति पर आधारित है। पाठ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संसद द्वारा लिए गए निर्णय सभी नागरिकों को प्रभावित करते हैं और यह निर्णय विभिन्न विचारों के आदान-प्रदान और विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं। युवा संसद की प्रतियोगिताओं का आयोजन शैक्षिक संस्थानों में किया जा रहा है ताकि युवा नागरिकों में सामूहिक विचार-विमर्श और नेतृत्व कौशल विकसित किया जा सके। यह पाठ इस बात पर जोर देता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि नागरिकों में आवश्यक कौशल और दृष्टिकोण का विकास करना भी है, ताकि वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सही तरीके से विचार कर सकें। अंत में, यह बताया गया है कि नागरिकता का शिक्षा केवल तथ्यों की जानकारी नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है, जिसमें विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से भाग लेने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए।
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