इस्लाम का विष - वृक्ष | Islam ka Vish -Vriksh

By: आचार्य चतुरसेन शास्त्री - Acharya Chatursen Shastri
इस्लाम का विष - वृक्ष  | Islam ka Vish -Vriksh by


दो शब्द :

इस्लाम का विष-वक्ष एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो इस्लाम के उद्भव, विकास और उसके ऐतिहासिक संदर्भों का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। लेखक आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने इस ग्रंथ में इस्लाम के आरंभिक काल, उसके सिद्धांतों, और उसके अनुयायियों के धर्म प्रेम के उदाहरणों का वर्णन किया है। वे बताते हैं कि कैसे इस्लाम ने अरब के रेगिस्तान में एक तूफान की तरह जन्म लिया और तलवार के बल पर अपने अनुयायियों की संख्या में वृद्धि की। लेखक का कहना है कि इस्लाम की संस्कृति, रीति-नीति और धार्मिक क्रियाकलापों के बीच एक गहरा संबंध है, और यह धर्म आज भी अपने अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद के जीवन और उनके सिद्धांतों का भी उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने एकेश्वरवाद और मानवता के कल्याण के लिए अपने प्रयासों का विवरण दिया है। इस्लाम के अनुयायियों की धार्मिक निष्ठा और बलिदान की भावना की चर्चा करते हुए, लेखक ने यह भी बताया कि कैसे इस धर्म के अनुयायी अपने विश्वास के लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने यह भी संकेत किया है कि इस्लाम का संदेश और इसकी शिक्षाएँ मानवता के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करती हैं, भले ही समय के साथ इसकी व्याख्याएँ और आचार-व्यवहार में परिवर्तन आए हों। अंत में, लेखक ने इस्लाम के बारे में साहित्यिक अध्ययन की कमी और इसके प्रति समाज में जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि इस महत्वपूर्ण विषय पर और अधिक गहन और व्यापक चर्चा हो सके। यह ग्रंथ न केवल इस्लाम के इतिहास को उजागर करता है, बल्कि इसे एक संदर्भ के रूप में प्रस्तुत करता है जिससे पाठक धर्म, संस्कृति और मानवता के संबंध को समझ सकें।


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