शिवराज विजय | Shivraj Vijay

By: पंडित श्री रामजी - Pandit Shri Ramji


दो शब्द :

इस पाठ में महाकवि अम्बिकादत्त व्यास के जीवन और काव्य को लेकर जानकारी दी गई है। उनका जन्म राजस्थान के धूला नामक गांव में हुआ था और वे एक प्रतिष्ठित काव्य मंडल के सदस्य थे। उनके पिता का नाम राजाराम था, जो एक विद्वान थे। अम्बिकादत्त ने अपनी शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त की और युवा अवस्था में ही कविता लिखने लगे। उनकी कविताएँ समय-समय पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत हुईं और उन्होंने कई महत्वपूर्ण काव्य रचनाएँ कीं। उनके द्वारा रचित नाटक "सामवत्तम्" को विशेष सराहना मिली। वे हिंदी, संस्कृत और बंगला भाषाओं में कुशल थे और उन्होंने अपने समय में साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अम्बिकादत्त के जीवन में कई कठिनाइयाँ आईं, जैसे कि परिवार के सदस्य का निधन और आर्थिक समस्याएँ, फिर भी उन्होंने साहित्यिक कार्य जारी रखा। वे अंततः एक प्रसिद्ध कवि बने और उन्हें कई सम्मान भी मिले, जैसे कि 'भारतभूषण' और 'विहारभूषण' उपाधियाँ। उनका निधन 1957 में हुआ, लेकिन उनकी साहित्यिक विरासत आज भी जीवित है। इस प्रकार, अम्बिकादत्त व्यास का जीवन एक संघर्ष और काव्य के प्रति उनकी निष्ठा का प्रतीक है, जिसने उन्हें महाकवि के रूप में स्थापित किया।


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