प्रौढ़ रचनानुवाद कौमुदी | Praudh - Rachananuvad Kaumudi

- श्रेणी: साहित्य / Literature
- लेखक: कपिलदेव द्विवेदी आचार्य - Kapildev Dwivedi Acharya
- पृष्ठ : 430
- साइज: 41 MB
- वर्ष: 1961
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दो शब्द :
"प्रोढ-स्बनानुबादकोसुदी" डॉ. कपिलदेव द्विवेदी द्वारा लिखी गई एक पुस्तक है जो नवीनतम वैज्ञानिक पद्धति से संस्कृत व्याकरण, अनुवाद, और निबंध सीखने के लिए तैयार की गई है। यह पुस्तक विशेष रूप से प्रौढ़ विद्यार्थियों के लिए है और इसमें संस्कृत सिखाने के विभिन्न उद्देश्य रखे गए हैं, जैसे कि सरल तरीके से अनुवाद और निबंध की शिक्षा देना, और छह महीने में प्रौढ़ संस्कृत लिखने और बोलने का अभ्यास कराना। पुस्तक में 60 अभ्यास शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक में नए शब्द और व्याकरण के नियम दिए गए हैं। इसके अलावा, शब्दकोश और व्याकरण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्गवरे भी शामिल हैं। लेखक ने यह सुनिश्चित किया है कि पुस्तक में उपयोगी संस्कृत शब्दों का संग्रह हो, जिसमें उच्च संस्कृत साहित्य में प्रयुक्त शब्दों को भी शामिल किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य उन लोगों को संस्कृत सीखने में सहायता प्रदान करना है जिनके पास इसके अध्ययन का अवसर नहीं है। लेखक ने कहा है कि यह पुस्तक उन छात्रों के लिए उपयोगी होगी जो रचनानुवादकोमुदी का पूर्व अभ्यास कर चुके हैं। इस पुस्तक में शामिल सामग्री और संरचना ने इसे संस्कृत अध्ययन में एक महत्वपूर्ण संसाधन बना दिया है। इस पुस्तक का समर्पण राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी को किया गया है, जो संस्कृत भाषा के प्रति प्रेम और संकल्प का प्रतीक है। पुस्तक का मूल्य 7.50 रुपये है और इसका पहला संस्करण 1961 में प्रकाशित हुआ था।
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