ब्रह्मचर्य -जीवन | Brahmacharya -Jeevan

- श्रेणी: Health and Wellness | स्वास्थ्य ब्रह्मचर्य/ Brahmcharya
- लेखक: स्वामी योगानन्द - Swami Yogannd
- पृष्ठ : 142
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1945
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश यह है कि "ब्रह्मचर्य-जीवन" एक महत्वपूर्ण विषय है जो मानव जीवन के लिए आवश्यक है। ब्रह्मचर्य का पालन स्वास्थ्य, शक्ति और आत्मा के विकास के लिए आवश्यक है। लेखक ने बताया है कि स्वास्थ्य ही जीवन का आधार है और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक है। पाठ में यह बताया गया है कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में स्वास्थ्य और ब्रह्मचर्य की शिक्षा का अभाव है, जो समाज में पतन का कारण बन रहा है। लेखक ने ब्रह्मचर्य की महिमा, उसके लाभ और उसके पालन के नियमों का उल्लेख किया है। ब्रह्मचर्य के लाभों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, शक्ति और साहस का विकास शामिल है। पाठ में यह भी कहा गया है कि समाज की कुरीतियों जैसे बाल विवाह, वृद्ध विवाह और अप्राकृतिक मैथुन को समाप्त करना आवश्यक है ताकि युवा पीढ़ी का विकास हो सके और समाज मजबूत बन सके। लेखक ने यह भी बताया कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता था और इसके परिणामस्वरूप समाज में उत्कृष्ट व्यक्तित्व का विकास होता था। पाठ के अंत में, लेखक ने ब्रह्मचर्य के नियमों और संयमिता का पालन करने का आग्रह किया है ताकि व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सके और समाज का कल्याण कर सके। इस प्रकार, पाठ का मुख्य संदेश यह है कि ब्रह्मचर्य का पालन करना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी आवश्यक है।
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