भारत में इस्लाम | Bharat Mein Islam

- श्रेणी: Islamic | इस्लामी भारत / India
- लेखक: आचार्य चतुरसेन शास्त्री - Acharya Chatursen Shastri
- पृष्ठ : 354
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1971
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दो शब्द :
इस पाठ में भारत की संस्कृति, इतिहास और विभिन्न जातियों के बीच के संबंधों पर चर्चा की गई है। भारत में अनेक विदेशी आक्रांताओं ने आक्रमण किए, लेकिन यहां की संस्कृति और जातियों ने मिलकर एक नया रूप धारण किया। आर्य और अन्य जातियों ने मिलकर एक समरस हिंदू जाति का निर्माण किया, जिसने विदेशी आक्रमणों का सामना किया। इस दौरान, भारत में दो प्रमुख सम्राट कनिष्क और विश्वमादित्य हुए, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया। मुस्लिम आक्रांताओं ने भारत में दो प्रकार के युद्ध किए - एक बाहरी और दूसरा आंतरिक। हालांकि, भारत में मुस्लिम आक्रांताओं को राजनीतिक रूप से सफलता मिली, लेकिन धार्मिक युद्धों में उन्हें बार-बार पराजित होना पड़ा। कुछ क्षेत्रों में हिंदू राजाओं ने मुस्लिम संस्कृति को अपनाया, लेकिन आम जनता में हिंदू-मुस्लिम एकता की भावना कमजोर रही। अकबर जैसे शासकों ने हिंदू-मुस्लिम एकता की दिशा में प्रयास किए, लेकिन सामाजिक और धार्मिक बंधनों ने इस एकता में बाधा डाली। भक्ति आंदोलन ने जातिवाद को चुनौती दी और लोगों के बीच समानता की भावना को बढ़ावा दिया। रामानंद स्वामी जैसे संतों ने जाति भेद को समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन समाज में गहरी छुआछूत की परंपरा बनी रही। पाठ के अंत में, आधुनिक भारत में मुस्लिम समुदाय की स्थिति पर चर्चा की गई है। भारतीय मुस्लिमों को अब भी बाहरी और परायापन का अनुभव हो रहा है। दोनों समुदायों के बीच की दूरी को कम करने के लिए सामाजिक और राजनीतिक नेताओं को सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है। पाठ में इस बात पर जोर दिया गया है कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच एकता और समरसता की आवश्यकता है, ताकि भारत का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध हो सके।
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