रामराज्य की कथा | Ramrajya ki Katha

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता हिंदू - Hinduism
- लेखक: यशपाल - Yashpal
- पृष्ठ : 124
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1951
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दो शब्द :
इस पाठ में गांधीवादी विचारधारा और कांग्रेस की राजनीति पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने गांधीवाद की स्वतंत्रता और इसके वास्तविक प्रभावों पर सवाल उठाए हैं, यह बताते हुए कि क्या गांधीवादी आदर्श वास्तव में भारतीय जनता की स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेखक का तर्क है कि गांधीवाद केवल पूंजीवादी व्यवस्था की रक्षा करता है और इसके जरिए कांग्रेस ने जनता के वास्तविक संघर्ष को एक सीमित निकास में बदल दिया। लेख में यह भी बताया गया है कि गांधीजी की सत्याग्रह और अहिंसा की नीतियाँ असल में ब्रिटिश साम्राज्य की शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ जनता के विद्रोह को कमजोर करने का एक साधन बनीं। कांग्रेस का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के तहत स्थापित व्यवस्था को बदलने के बजाय, केवल सत्ता के नियंत्रण को अपने हाथ में लेना था। इसके परिणामस्वरूप, आम जनता को केवल निराशा और दमन का सामना करना पड़ा। इस प्रकार, लेखक ने गांधीवादी रामराज्य के प्रति जनता की बढ़ती असंतोष को दर्शाया है और दिखाया है कि कैसे कांग्रेस की नीतियाँ वास्तव में पूंजीपतियों के हितों की रक्षा कर रही हैं। अंततः, लेखक यह संकेत करते हैं कि गांधीवाद का मूल उद्देश्य केवल सत्ता में बदलाव था, जबकि वास्तविक सामाजिक और आर्थिक सुधारों की आवश्यकता को नजरअंदाज किया गया।
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