कस्तूरी कुंडलि बसै | Kasturi Kundali Basai

- श्रेणी: काव्य / Poetry हिंदी / Hindi
- लेखक: आचार्य श्री रजनीश (ओशो) - Acharya Shri Rajneesh (OSHO)
- पृष्ठ : 285
- साइज: 10 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में रजनीश (ओशो) द्वारा कबीर की वाणी पर आधारित प्रवचनों का संकलन प्रस्तुत किया गया है। रजनीश ने कबीर के विचारों के माध्यम से जीवन, धर्म और आत्मज्ञान के गूढ़ रहस्यों को उजागर किया है। उन्होंने बताया है कि व्यक्तियों का जीवन एक कठिन यात्रा है, जिसमें अनेक बाधाएं आती हैं। रजनीश ने एक कहानी के माध्यम से समझाया है कि आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को कई चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तिब्बत में हुए एक आश्रम की घटना का उदाहरण दिया, जिसमें एक साधु के स्थान पर दस साधुओं को भेजा गया, यह दर्शाने के लिए कि जब दस लोग यात्रा पर निकलते हैं तो केवल एक ही सही मार्ग पर पहुँच पाता है। इसका अर्थ यह है कि आध्यात्मिकता की यात्रा में अनेकों रुकावटें और प्रलोभन होते हैं, लेकिन जो सच्चा साधक होता है, वही अंततः अपने लक्ष्य तक पहुँचता है। रजनीश ने यह भी कहा कि वास्तव में, सभी पूजा-पाठ और धार्मिक क्रियाएँ बाहरी होती हैं, लेकिन आंतरिक सत्य और अनुभव की आवश्यकता होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि बाहरी मंदिरों और पूजा स्थलों में जाने से व्यक्ति की आत्मा की शुद्धि नहीं होती, क्योंकि वे मानव निर्मित होते हैं और उनमें मानव की अनुकृतियाँ होती हैं। असली पूजा और भक्ति तो भीतर के मंदिर में होती है, जो कि चैतन्य का स्थान है। अंततः, रजनीश ने यह संदेश दिया कि सच्चे साधक को अपने भीतर की यात्रा करनी होगी और अपने आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से ही परमात्मा को प्राप्त करना होगा। उन्होंने कबीर के शब्दों को उद्धृत करते हुए बताया कि वास्तविकता केवल एक ही है, और उसे पहचानना ही सच्ची साधना है।
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