अभिधनारजेन्द्र : | Abhidhanarajendra:

- श्रेणी: जैन धर्म/ Jainism साहित्य / Literature
- लेखक: विजया राजेंद्र सुरी - Vijayarajendra Suri
- पृष्ठ : 1494
- साइज: 137 MB
- वर्ष: 1913
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में "अभिधानराजेनद्र" नामक ग्रंथ की रचना और उसके महत्व का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से प्राकृत और संस्कृत शब्दों का एक व्यापक कोश है, जिसे विस्तृत अध्ययन और शोध के माध्यम से तैयार किया गया है। इसकी रचना का कार्य साढ़े चौदह वर्षों की मेहनत के बाद पूरा हुआ। इस कोश के प्रकाशन की आवश्यकता को समझते हुए, विभिन्न विद्वानों और संस्थाओं ने मिलकर इसे प्रकाशित करने का निर्णय लिया। ग्रंथ के निर्माण में शामिल प्रमुख व्यक्तियों और उनके योगदान का उल्लेख किया गया है। इसमें उल्लेखित विद्वानों ने ज्ञान और साधना के माध्यम से इस कोश को संपूर्णता प्रदान की है। पाठ में यह भी बताया गया है कि इस कोश का उद्देश्य जैन साहित्य और संस्कृति को संरक्षित करना है। अंत में, यह बताया गया है कि यह कोश अनेक स्थानों पर उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। यह ग्रंथ न केवल एक शब्दकोश के रूप में कार्य करेगा, बल्कि यह जैन धर्म के अनुयायियों के लिए ज्ञान का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी बनेगा।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.