पातंजल योग दर्शन के विशेष परिप्रेक्ष्य में आधुनिक योगाचार्यों के मतों की समीक्षा | Patanjal Yog Darshan ke Vishesh Pariprekshya mein Adhunik Yogacharyo Ke Mato ki Smiksha

- श्रेणी: योग / Yoga साहित्य / Literature
- लेखक: कौशल किशोर - Kaushal Kishore
- पृष्ठ : 288
- साइज: 19 MB
- वर्ष: 2003
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दो शब्द :
यह शोध प्रबंध "पातञ्जल योग दर्शन के विशेष परिप्रेक्ष्य में आधुनिक योगाचार्यों के मतों की समीक्षा" पर आधारित है। इसमें पातञ्जलि के योग दर्शन का महत्व और इसकी प्रासंगिकता को उजागर किया गया है। आज के समाज में अराजकता, द्वेष, और हिंसा की बढ़ती समस्या को देखते हुए, लेखक ने पातञ्जलि के विचारों को अपनाने की आवश्यकता बताई है। पातञ्जलि ने जो साधन और तात्त्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं, वे आज के भौतिकवादी समाज में मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। शोध में पातञ्जलि के योग सूत्रों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें समाधि, साधना, और विभिन्न योग पादों का विवरण है। आधुनिक योगाचार्यों जैसे स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, और आचार्य रजनीश के विचारों की तुलना की गई है। लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला है कि पातञ्जलि का मार्गदर्शन अपनाकर हम एक स्वस्थ और संतुलित समाज का निर्माण कर सकते हैं। शोध कार्य के दौरान विभिन्न पुस्तकालयों से सामग्री का संग्रह किया गया, और कई विद्वानों तथा शिक्षकों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। अंत में, लेखक ने अपने माता-पिता, शिक्षकों, मित्रों और परिवार का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस शोध कार्य के संपादन में सहायता की।
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