ब्रह्म ज्ञान दर्पण | Brahm Gyan Darpan

- श्रेणी: धार्मिक / Religious साहित्य / Literature
- लेखक: भैरव दत्त - Bhairav Dutt
- पृष्ठ : 192
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1955
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दो शब्द :
इस पाठ में बुढ़ापे और जीवन के वास्तविकता को समझाया गया है। बुढ़ापे की स्थिति में आने पर व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्षमताएं कम होती जाती हैं। इस अवस्था में व्यक्ति को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, परिवार का सहयोग न मिलना और समाज में स्थिति का परिवर्तन। पाठ में बुढ़ापे की कठिनाइयों को चित्रित किया गया है। यह बताया गया है कि बुढ़ापे में लोग अक्सर अकेले पड़ जाते हैं और उनके जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है। बुढ़ापे का जीवन एक प्रकार से भोगों और इच्छाओं से मुक्त होने की स्थिति भी है, जहां व्यक्ति को आत्मा और परमात्मा के ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसमें यह भी कहा गया है कि बुढ़ापे में व्यक्ति को सच्चे मित्रों और परिवार की आवश्यकता होती है, लेकिन जब ये साथी चले जाते हैं, तो जीवन में एकाकीपन का अनुभव होता है। पाठ में बुढ़ापे की वास्तविकता को समझाने के लिए कुछ कविताएं और शायरी भी शामिल की गई हैं, जो इस अवस्था के दर्द और संघर्ष को व्यक्त करती हैं। अंत में, बुढ़ापे को एक अनिवार्य स्थिति के रूप में स्वीकार करने और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होने का संदेश दिया गया है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम चरण में शांति और संतोष प्राप्त कर सके।
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