दीन जन चिकित्सा | Deen Jan Chikitsa

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद साहित्य / Literature
- लेखक: पं प्यारेलाल रुग्गू - Pt. Pyarelal Ruggu
- पृष्ठ : 356
- साइज: 16 MB
- वर्ष: 1959
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दो शब्द :
इस पाठ में चिकित्सा की विद्या का महत्व और इसकी उत्पत्ति का वर्णन किया गया है। लेखक ने भगवान का धन्यवाद किया है, जिसने मानवता के कल्याण के लिए चिकित्सा के ज्ञान को प्रकट किया। इस विद्या की शुरुआत समुद्र मंथन के दौरान धन्वंतरि के आगमन से हुई, जिन्होंने औषधियों का ज्ञान प्रदान किया। पाठ में यह भी बताया गया है कि चिकित्सा की विभिन्न विद्या, जैसे यूनानी चिकित्सा, एक ही प्रकार की होती हैं, लेकिन उनमें कुछ अंतर होता है जो देश और मत के अनुसार होता है। पुस्तक 'इलाजुल्युरवा भाषा' का परिचय दिया गया है, जिसे फारसी से उर्दू में अनुवादित किया गया है। यह पुस्तक चिकित्सा के सरल उपायों को प्रस्तुत करती है, जिससे गरीब और अमीर दोनों लाभ उठा सकते हैं। लेखक ने बताया है कि इसमें लिखी गई औषधियाँ और चिकित्सा के तरीके सस्ते और प्रभावी हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ और प्रयोग कर सकता है। लेखक ने इस पुस्तक के प्रकाशित होने की आवश्यकता को महसूस किया और इसके उर्दू में अनुवाद करने का कार्य किया, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। अंत में, लेखक ने प्रार्थना की है कि यह पुस्तक पाठकों और रोगियों के लिए कल्याणकारी सिद्ध हो। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा के ज्ञान को सरल और सुलभ बनाना है, ताकि सभी लोग अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें।
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