महापुराण आदिपुराण | Mahapurana Adipurana

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious
- लेखक: पं पन्नालाल जैन साहित्याचार्य - Pt. Pannalal Jain Sahityachary
- पृष्ठ : 715
- साइज: 49 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
यह पाठ "महापुराण" नामक संस्कृत ग्रंथ का परिचय और उसके महत्व का वर्णन करता है। इसे श्रीमहागविजिनसेनाचार्य द्वारा प्रणीत किया गया है और इसका पहला भाग "आदिपुराण" के नाम से जाना जाता है। यह ग्रंथ भारतीय ज्ञानपीठ की सूर्तिदेवी जैन ग्रंथमाला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ज्ञान की विलुप्त सामग्री को प्रकाशित करना और लोकहितकारी साहित्य का निर्माण करना है। इस ग्रंथ का हिंदी अनुवाद पं. पन्नालाल जैन द्वारा किया गया है। ज्ञानपीठ मूर्तिदेवी ग्रंथमाला की स्थापना सेठ शान्तिप्रसाद जी की माता की स्मृति में की गई है। ग्रंथों का सम्पादन और मुद्रण कार्य जारी है। पाठ में यह भी उल्लेखित है कि "आदिपुराण" का एक पूर्व संस्करण पहले ही प्रकाशित हो चुका है, लेकिन इस संस्करण की विशेषता यह है कि इसमें प्राचीन प्रतियों के पाठशोधन के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ भी शामिल की गई हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ श्लोकों का विवरण दिया गया है जो ज्ञान और मोक्ष के विषय में हैं। ग्रंथ की प्रस्तावना में विद्वान संपादक ने विभिन्न विषयों पर विचार किए हैं, जैसे कि संस्कृत और प्राकृत भाषाओं का संबंध। उन्होंने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि प्राकृत भाषा स्वाभाविक जनभाषा है, जबकि संस्कृत एक शास्त्रीय और संरचित भाषा है। पुराणों के उद्गम और उनके रचनात्मक प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें विभिन्न तीर्थंकरों और उनके जीवन के महत्वपूर्ण तथ्यों का संग्रह शामिल है। इस प्रकार, "महापुराण" न केवल धार्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय साहित्य की समृद्धि को भी दर्शाता है।
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