घाट रामयण  | Ghat Ramayan by


दो शब्द :

यह पाठ संत तुलसी साहिब के जीवन और उनके कार्यों का वर्णन करता है। संत तुलसी साहिब, जिन्हें लोग साहिबजी भी कहते थे, एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। उनके पिता ने उनका विवाह किया, लेकिन उन्होंने ब्रह्मचर्य को अपनाया और अपनी पत्नी से अलग रहे। उनकी पत्नी, लक्ष्मीबाई, उनकी सेवा करती रही। तुलसी साहिब ने अपने जीवन के अधिकांश समय को भक्ति और साधना में बिताया। उन्होंने राजगद्दी का त्याग कर दिया और जंगलों, पहाड़ों और विभिन्न शहरों में घूमकर लोगों को उपदेश दिया। अंततः वे हाथरस में स्थायी रूप से रहने लगे, जहाँ उन्होंने सत्संग का आयोजन किया। उनका जीवन चमत्कारों से भरा रहा, जैसे बीमारियों का इलाज करना, मृतकों को जीवित करना, और अंधों को दृष्टि देना। हालांकि, संतों की शक्तियों का प्रदर्शन करने से वे कतराते थे। उनकी शिक्षाओं का उद्देश्य लोगों को सत्य मार्ग पर चलना सिखाना था। संत तुलसी साहिब का निधन लगभग 1820 के आसपास हुआ, और उनके अनुयायी आज भी उनके जीवन और शिक्षाओं का पालन करते हैं। पाठ में संतबानी पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें संतों की बानी और उपदेशों को संरक्षित करने का प्रयास किया गया है। संत तुलसी साहिब की शिक्षाएँ और उनके जीवन का वर्णन लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं, और उनकी उपदेशों का उद्देश्य सामान्य जन के हित में है।


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