अमृता प्रीतम | Amrita Pritam

By: अमृता प्रीतम - Amrita Pritam
अमृता प्रीतम  | Amrita Pritam by


दो शब्द :

इस पाठ में अमृता प्रीतम की कहानी "जंगली बूटी" का वर्णन किया गया है। इसमें एक महिला, अंगूरी, की कहानी है जो अपने पति प्रभाती के साथ गाँव से शहर आई है। प्रभाती की यह दूसरी शादी है और अंगूरी की उम्र अभी छोटी है। कहानी में अंगूरी की जीवनशैली, उसके पहनावे और उसकी सोच का चित्रण किया गया है। अंगूरी अपने पति के साथ एक नई जिंदगी जीने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह अपने गाँव की परंपराओं से बंधी हुई है। वह पढ़ाई को पाप मानती है और यह सोचती है कि गाँव की औरतों को पढ़ने की अनुमति नहीं है। कहानी में संवादों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि अंगूरी का जीवन प्रेम और विवाह की पारंपरिक धारणाओं से भरा हुआ है। वह बताती है कि कैसे लड़कियाँ छोटी उम्र में बिना अपने होने वाले पति को देखे विवाह करती हैं और प्रेम करने में भी पाप का अहसास करती हैं। अंगूरी एक जंगली बूटी के बारे में बताती है, जिसे खाने के बाद लड़कियाँ किसी पुरुष के प्रति प्रेम करने लगती हैं। यह जंगली बूटी प्रेम की एक अस्वाभाविक और अनैतिक धारणा को दर्शाती है। कहानी में अंगूरी के जीवन और उसके विचारों के माध्यम से समाज की कई जटिलताओं को उजागर किया गया है, जैसे विवाह, प्रेम, और औरतों की स्थिति। अंततः, यह कहानी अंगूरी के माध्यम से न केवल उसकी व्यक्तिगत कहानी को बताती है, बल्कि समाज की उन रूढ़ियों और परंपराओं को भी उजागर करती है, जो महिलाओं के जीवन को प्रभावित करती हैं।


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