गरुड़ - पुराण | Garuda Purana

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: वेदमूर्ति तपोनिष्ठ - Vedmurti Taponishth श्रीराम शर्मा आचार्य - Shri Ram Sharma Acharya
- पृष्ठ : 504
- साइज: 8 MB
- वर्ष: 1968
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दो शब्द :
इस पाठ में 'गरुड़ पुराण' के महत्व और इसके धार्मिक कार्यों के बारे में चर्चा की गई है। 'गरुड़ पुराण' हिंदू धर्म में मृत्युपरांत के कर्मकांड को महत्वपूर्ण मानता है, जिसमें दाह संस्कार, श्राद्ध, तेरहवीं, और अन्य अनुष्ठानों का वर्णन है। ये कर्मकांड समाज में विशेष स्थान रखते हैं और लोग इनका पालन करते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़े। पाठ में बताया गया है कि पुनर्जन्म का सिद्धांत हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण है। यह विचार जनमानस में गहराई तक व्याप्त है कि अच्छे या बुरे कर्मों का प्रभाव अगले जन्म में दिखाई देता है। हालांकि, कुछ लोग इस सिद्धांत का गलत अर्थ निकालकर गलत कार्य भी कर लेते हैं। 'गरुड़ पुराण' में कर्मकांडों का पालन करने की प्रेरणा दी गई है, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि केवल कर्मकांड करने से नहीं, बल्कि सच्चे मन से धर्म का पालन करने से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसमें यह भी कहा गया है कि बाहरी कर्मकांड और दान का महत्व तभी है जब वे सच्चे मन से किए जाएं। ज्ञान और सदाचार के बिना केवल कर्मकांड करने से किसी को भी मोक्ष नहीं मिल सकता। इस प्रकार, 'गरुड़ पुराण' न केवल कर्मकांडों का वर्णन करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि सही आस्था और श्रद्धा के साथ धर्म का पालन करना आवश्यक है।
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