हिंदी निर्गुण काव्य का प्रारम्भ और नामदेव की हिंदी कविता | Hindi Nirgun Kavya Ka Prarambh Aur Namdev Ki Hindi Kavita

- श्रेणी: काव्य / Poetry साहित्य / Literature
- लेखक: डॉ. शं॰ के॰ आडकर - Dr. S. K Aadakar
- पृष्ठ : 332
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1972
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दो शब्द :
इस पाठ में हिंदी संत साहित्य और विशेष रूप से निर्गुण काव्य की परंपरा पर चर्चा की गई है। यह बताया गया है कि संत कबीर को निर्गुण काव्य का प्रारंभिक प्रवर्तक माना जाता है, लेकिन नामदेव की हिंदी रचनाओं को भी इस धारा में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। नामदेव की रचनाएँ मुख्यतः मराठी में हैं, लेकिन हाल ही में उनकी हिंदी रचनाओं को प्रकाशित किया गया है, जिससे यह सिद्ध होता है कि उनकी रचनाओं में निर्गुण काव्य की सभी प्रवृत्तियाँ विद्यमान हैं। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि संत साहित्य का अध्ययन विभिन्न विद्या संस्थानों में हो रहा है और यह लोक-काव्य के रूप में सहज जीवन से जुड़ा हुआ है। नामदेव की रचनाओं का साहित्यिक मूल्यांकन किया गया है और उनके काव्य की विशेषताओं, उनके विचारों और उनके प्रभाव को समझने की कोशिश की गई है। शोध प्रबंध में सात अध्यायों के माध्यम से नामदेव की जीवनी, उनके विचार, उनकी रचनाओं का मूल्यांकन और निर्गुण काव्य की प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है। अंत में, यह कहा गया है कि नामदेव को हिंदी निर्गुण काव्य का प्रवर्तक माना जाना चाहिए और उनके कार्य को समझने के लिए इस शोध प्रबंध का महत्व है। यह हिंदी संत साहित्य के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे आगे के अध्ययन के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
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