भारतीय दर्शन खंड-२ | Bhartiya darshan Khand - 2

By: सर्वपल्ली राधाकृष्णन - Dr. Sarvpalli Radhakrishnan
भारतीय दर्शन खंड-२ | Bhartiya darshan Khand - 2 by


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय दर्शन के द्वितीय खंड की चर्चा की गई है, जिसमें वेदिक दर्शन का विवेचन किया गया है। लेखक ने पहले खंड की तरह ही योजना और विधि अपनाई है। उन्होंने प्राचीन लेखकों और उनके विचारों की व्याख्या करते हुए उन्हें आज के विचारों के संदर्भ में रखने का प्रयास किया है। पुस्तक के लेखक ने विभिन्न दर्शनों के विचारों को समझाने के लिए गहन विश्लेषण किया है और यह बताया है कि किस प्रकार विभिन्न विचारधाराएँ एक-दूसरे से भिन्न हैं। उन्होंने वाचस्पति मिश्र के दृष्टिकोण को अपनाया है और यह दर्शाया है कि वे प्राचीन विचारों में विश्वास रखते हैं। लेखक ने यह स्वीकार किया है कि उनके विचारों में भिन्नताएँ हो सकती हैं और उन्होंने यह भी बताया है कि उनकी प्रस्तुतियों में कुछ भूलें हो सकती हैं, लेकिन वे प्रमाणों के साथ विवेचन करने का प्रयास कर रहे हैं। पुस्तक में न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, पूर्वमीमांसा, वेदांत और अद्वैत वेदांत जैसे दर्शनों का विवेचन किया गया है। प्रत्येक दर्शन की विशेषताओं, सिद्धांतों और आलोचनात्मक विचारों का समावेश किया गया है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि उनका उद्देश्य पाठकों को भारतीय दर्शन के विविध पहलुओं से अवगत कराना है और उन्होंने इस कार्य में कई विद्वानों से सहायता ली है। इस खंड में दर्शनों की जटिलताओं को समझाने का प्रयास किया गया है, और लेखक ने पाठकों से यह अपेक्षा की है कि वे इसे गहनता से समझने का प्रयास करें। पाठक को यह भी बताया गया है कि विभिन्न दर्शन आपस में कैसे सम्बंधित हैं और वे किस प्रकार से भारतीय ज्ञान परंपरा का हिस्सा हैं। लेखक ने अपने मित्रों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने पुस्तक के निर्माण में सहायता की।


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