लेखन कला का इतिहास ( द्वितीय खंड) | Lekhan Kala Ka Itihas( Khand 2 )

- श्रेणी: इतिहास / History साहित्य / Literature
- लेखक: ईश्वर - Chandr Rahi भदनसिंह-राणा - bhadanasingh-rana
- पृष्ठ : 503
- साइज: 48 MB
- वर्ष: 1983
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दो शब्द :
यह पाठ "लेखन कला का इतिहास" नामक पुस्तक के बारे में है, जिसे लेखक ईश्वर चन्द्र राही ने लिखा है। यह पुस्तक भारतीय भाषाओं के माध्यम से शिक्षण की व्यवस्था के अंतर्गत प्रकाशित की गई है। इसमें लेखन कला के विकास, विभिन्न लिपियों के उद्गम और मानवता के सांस्कृतिक विकास का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। लेखक ने विश्व की भाषाओं और उनकी लिपियों के इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जिससे मानवता के ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता के विकास को समझा जा सके। पुस्तक की प्रस्तावना में बताया गया है कि लेखन कला मानव सभ्यता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ज्ञान के सृजन और संरक्षण की क्षमता प्रदान करती है। लेखन के आविष्कार और उसमें सुधार की प्रक्रिया को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने विभिन्न देशों की यात्रा करके अनेक पुस्तकालयों में शोध किया और विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया, जिससे उन्होंने इस पुस्तक को तैयार किया। इस पुस्तक में प्राचीन लिपियों के विकास, मानव जाति के सामूहिक योगदान, और विभिन्न भाषाओं की विशेषताओं का उल्लेख है। यह पुस्तक न केवल हिन्दी में, बल्कि अन्य भाषाओं में भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ मानी जा सकती है। इसके लेखक और पुनरीक्षक दोनों की मेहनत की सराहना की गई है, और इस कार्य को मानवता के लिए एक बहुमूल्य योगदान बताया गया है।
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