लाल पसीना | Laal Pasina

By: अभिमन्यु अनत - Abhimanyu Anat
लाल पसीना | Laal Pasina by


दो शब्द :

"लाल पसीना" एक उपन्यास है जो इतिहास के जीवंत पहलुओं और मानव संघर्ष को दर्शाता है। इसमें दो भिक्षुओं की कहानी है, जो एक नई भूमि की तलाश में समुद्र पर यात्रा करते हैं। ये भिक्षु ताम्रपर्णी से निकलकर महासागर में आगे बढ़ते हैं। उनकी यात्रा में उन्हें कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कि पानी की कमी और भयंकर समुद्री तूफान। जब वे समुद्र में आगे बढ़ते हैं, तो अचानक एक अंधेरा और भयावह तूफान आ जाता है। दोनों भिक्षु एक-दूसरे का सहारा लेते हैं और अपने अस्तित्व की लड़ाई में जुट जाते हैं। तूफान के कारण उनकी नाव डगमगाने लगती है, और वे अपने जीवन के लिए संघर्ष करते हैं। उनकी यात्रा में समुद्र की उथल-पुथल और ज्वारभाटों का सामना करते हुए, वे एक नए द्वीप के जन्म का साक्षी बनते हैं। यह द्वीप धीरे-धीरे विभिन्न जातियों और संस्कृतियों का केंद्र बन जाता है। यहाँ तक कि विभिन्न साम्राज्यों का आगमन होता है, जो इस द्वीप की महत्ता को समझते हैं। उपन्यास का यह हिस्सा यह दर्शाता है कि कैसे मानवता ने इतिहास के पन्नों में अपनी पहचान बनाई है, और कैसे संघर्ष और साहस से नए अध्याय लिखे जाते हैं। यह कहानी न केवल भौगोलिक यात्राओं की है, बल्कि मानव आत्मा की अदम्य जिजीविषा की भी है।


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