दो शब्द :

"वन स्ट्रॉ रिवोल्यूशन" पुस्तक में मसनोबू फुकुओका ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और उनके अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने पारंपरिक कृषि पद्धतियों की आलोचना करते हुए एक नई दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जिसमें खेती को प्राकृतिक तरीके से करने पर जोर दिया गया है। फुकुओका का तर्क है कि खेती में मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम करना चाहिए और प्रकृति को उसके प्राकृतिक चक्रों के अनुसार काम करने देना चाहिए। उन्होंने 'वन स्ट्रॉ' विधि का उपयोग करते हुए यह दिखाया कि बिना जुताई और रासायनिक उर्वरकों के खेती संभव है। इस विधि में केवल एक बार फसल को बोया जाता है और उसके बाद इसे प्राकृतिक रूप से विकसित होने दिया जाता है। फुकुओका ने अपने अनुभवों के माध्यम से यह बताया है कि कैसे प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक स्थिति को भी सुधार सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थ अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और यह किसानों को आत्मनिर्भर बनाता है। इस पुस्तक में फुकुओका ने अपने कृषि प्रयोगों के उदाहरण दिए हैं, जिनमें उन्होंने यह सिद्ध किया कि कैसे प्राकृतिक खेती के माध्यम से फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बढ़ाया जा सकता है। उनका मानना है कि खेती का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक जीवनशैली होनी चाहिए जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील हो। इस प्रकार, "वन स्ट्रॉ रिवोल्यूशन" न केवल खेती के तरीकों में बदलाव की बात करता है, बल्कि यह एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है जो जीवन के अन्य पहलुओं को भी प्रभावित करता है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो प्राकृतिक और स्थायी कृषि के प्रति रुचि रखते हैं।


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