अथ रघुवंशसार | Ath Raghuvanshsaar

- श्रेणी: संस्कृत /sanskrit साहित्य / Literature
- लेखक: कालिदास - Kalidas
- पृष्ठ : 128
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1912
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दो शब्द :
यह पाठ महाकवि कालिदास के रघुवंश महाकाव्य का सरल हिंदी भावानुवाद है। इसमें अयोध्या नगर का वर्णन है, जो एक समय में अत्यंत समृद्ध और न्यायपूर्ण था, जहाँ सूर्यवंशी राजा दिलीप ने शासन किया। राजा दिलीप के पिता मनु थे, जो सूर्य के पुत्र माने जाते हैं। दिलीप का व्यक्तित्व अलौकिक और असाधारण है, और वह एक बुद्धिमान और उदार राजा हैं। उनके शासनकाल में प्रजा सुखी और समृद्ध थी, और राजा ने अपने राज्य में न्याय और शांति बनाए रखी थी। राजा दिलीप की पत्नी सुदक्षिणा हैं, और उनका कोई संतान नहीं है, जिससे वह दुखी रहते हैं। एक दिन, राजा ने अपनी पत्नी के दुःख को समझते हुए वशिष्ठ ऋषि के पास जाने का निश्चय किया। उन्होंने अपनी रानी को साथ लेकर यात्रा शुरू की, जहाँ उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। इस यात्रा के दौरान, वह वशिष्ठ ऋषि के आश्रम पहुँचते हैं, जहाँ उन्हें विभिन्न ऋषियों और तपस्वियों के दर्शन होते हैं। राजा दिलीप की कहानी में उनके गुण, राज्य की स्थिति और उनके दुख का वर्णन है, जो आगे चलकर उनके जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ों की ओर इशारा करता है। यह पाठ रघुवंश महाकाव्य की गहराई और भारतीय संस्कृति के मूल्य को उजागर करता है, जिससे पाठक न केवल काव्य का आनंद ले सकें, बल्कि उस समय के सामाजिक और राजनीतिक जीवन को भी समझ सकें।
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