राधारानी | Radha Rani

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel साहित्य / Literature
- लेखक: श्रीनाथ सिंह - Shri Nath Singh
- पृष्ठ : 109
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1958
-
-
Share Now:
दो शब्द :
यह पाठ श्रीनाथ सिंह द्वारा लिखित पौराणिक उपन्यास "चछ0 जरीरेस्ड खर्वतो प्छुरलाण्>" का सारांश है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण और राधा के संबंध में गहन विचार और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है। उपन्यास की भूमिका में बताया गया है कि भगवान ने विभिन्न रूपों में अवतार लिया, जैसे विष्णु-लक्ष्मी, सीता-राम और राधा-कृष्ण। जबकि विष्णु और लक्ष्मी की कथाएँ पुराणों में विस्तृत हैं, राधा का उल्लेख बहुत कम मिलता है, जिससे उनके महत्व पर प्रश्न उठता है। लेखक ने पिछले 20 वर्षों में राधा-कृष्ण संबंधी सभी साहित्य का अध्ययन किया है और इस उपन्यास के माध्यम से राधा की वास्तविक कथा प्रस्तुत की है। इसमें राधा के जीवन का एक चित्रण है, जिसमें उनकी सुबह की दिनचर्या, यशोदा और वृषभानु के साथ संवाद और उद्धव का आगमन शामिल है। राधा की गोपियों के साथ बातचीत, उनके जीवन की जटिलताएँ और ऋषियों के साथ उनका संवाद उपन्यास के महत्वपूर्ण तत्व हैं। राधा का चरित्र, उनकी भावनाएँ और कृष्ण के प्रति उनकी भक्ति का गहरा चित्रण इस उपन्यास में किया गया है। पाठ में राधा के जन्मोत्सव की तैयारी, उद्धव का आगमन और गोपियों के बीच की बातचीत को दर्शाया गया है, जो उनके जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को उजागर करता है। उपन्यास में राधा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव व्यक्त किया गया है, जो पाठकों को उनकी कथा में गहराई से जोड़ता है। इस प्रकार, यह उपन्यास राधा के जीवन और कृष्ण के साथ उनके संबंधों की एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण और अद्वितीय प्रस्तुति है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.