वेणी संहार | Veni Sanhar

- श्रेणी: नाटक/ Drama साहित्य / Literature
- लेखक: डॉ शिवराज शास्त्री - Dr Shiv Raj Shastri
- पृष्ठ : 358
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1960
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दो शब्द :
शरद जोशी का यह पाठ वेणीसंहार नाटक के हिंदी अनुवाद और उसके संपादन पर केंद्रित है। वेणीसंहार नाटक को भारतीय विश्वविद्यालयों में संस्कृत पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है और इसका हिंदी में कोई उपयुक्त संस्करण उपलब्ध नहीं था। इस संदर्भ में प्रस्तुत संस्करण को उच्च कक्षाओं के छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस संस्करण में मूल पाठ के साथ हिंदी अनुवाद दिया गया है, जिससे पाठक संस्कृत और हिंदी का मिलान कर सकें। अनुवाद में शब्दश: अनुवाद पर जोर दिया गया है ताकि पाठक मूल पाठ को समझ सकें। भूमिका में कवि और उनकी कृति का विस्तृत विवेचन किया गया है, जिसमें भट्टनारायण के जीवन, समय और उनके कार्यों के बारे में जानकारी दी गई है। भट्टनारायण के जीवन के बारे में कई सवाल हैं, जैसे उनकी जाति और उनका स्थान, जो स्पष्ट नहीं है। कुछ विद्वानों का मानना है कि वे ब्राह्मण थे, जबकि अन्य उन्हें क्षत्रिय मानते हैं। भट्टनारायण के धर्मिक विचार भी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन उनके नाटक में कृष्ण और शिव की स्तुति की गई है, जिससे उनका वैष्णव या शैव होना संदिग्ध है। भट्टनारायण के काव्य और नाट्य शास्त्र की जानकारी भी पाठ में दर्शाई गई है, जिसमें यह बताया गया है कि उन्होंने महाभारत से कथावस्तु ली है और विभिन्न छंदों और अलंकारों का प्रयोग किया है। पाठ में वेणीसंहार की विशेषताओं और इसके नाट्यशास्त्र की जानकारी को भी प्रस्तुत किया गया है। संपादक ने पाठकों से आशा की है कि यह संस्करण उनकी आवश्यकताओं को पूरा करेगा और यदि इसमें कोई त्रुटियाँ हैं, तो उन्हें सुधारने के लिए सुझाव देने का आग्रह किया है।
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