श्री उत्तराखंड- यात्रा- दर्शन | Shri Uttarakhand- Yatra- Darshan

By: चंद्रशेखर सास्त्री - Chandrashekhar Sastri
श्री उत्तराखंड- यात्रा- दर्शन | Shri Uttarakhand- Yatra- Darshan by


दो शब्द :

यह पाठ डाक्टर सम्पूर्णानंदजी के कार्यों और उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर पर केंद्रित है। लेखक ने उत्तराखंड के धार्मिक स्थानों, उनके इतिहास और प्रभावों पर विचार प्रस्तुत किए हैं। पाठ में हिमालय की पवित्रता और भारतीय संस्कृति में उसके योगदान का उल्लेख किया गया है। लेखक ने बताया है कि उत्तराखंड, जिसे केदारखंड भी कहा जाता है, में अनेक देवी-देवताओं की पूजा होती है और यहां की संस्कृति में ऋषियों और मुनियों का योगदान रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र की धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं प्राचीन हैं, जो आयों के आगमन से पूर्व की हैं। आगे बढ़ते हुए, लेखक ने खस जाति के इतिहास और उनके धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला है। खस जाति का इतिहास और उनकी धार्मिक मान्यताएं, उनके देवी-देवताओं के आदान-प्रदान और संस्कृति में उनके योगदान को स्पष्ट किया गया है। पाठ में यह बताया गया है कि खस जाति ने भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वे अपने पूर्वजों की परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए हैं। इस पुस्तक को यात्रा की डायरी के रूप में नहीं, बल्कि एक शोध कार्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें विभिन्न स्रोतों और प्रमाणों के माध्यम से उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों और उनके इतिहास का अध्ययन किया गया है। लेखक ने उत्तराखंड के तीर्थों के इतिहास और व्यवस्था पर विचार किए हैं, यह दर्शाते हुए कि कैसे ऐतिहासिक घटनाओं ने आज की धार्मिक मान्यताओं को आकार दिया है। अंत में, लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक महत्व को समझने के लिए गहरे शोध और अध्ययन की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और संस्कृति का ज्ञान हो सके।


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