भूदान यज्ञ | Bhudan Yagy

- श्रेणी: इतिहास / History
- लेखक: राममूर्ति - rammurti
- पृष्ठ : 793
- साइज: 26 MB
- वर्ष: 1971
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दो शब्द :
इस पाठ में गांधीजी के विचारों और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की गई है। पाठ में यह बताया गया है कि गांधीजी ने समाज में समानता, आत्मनिर्भरता और गांवों के विकास पर जोर दिया। वे मानते थे कि असली विकास गांवों में होना चाहिए, क्योंकि गांव ही जीवन की मूल इकाई हैं। उन्होंने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की बात की थी, जिससे गांवों में उत्पादन बढ़ सके और हर घर में उद्योग स्थापित हो सके। पाठ में आज के समय में गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता की समस्याओं का उल्लेख किया गया है। यह बताया गया है कि आज भी वही सवाल हैं जिन्हें गांधीजी ने उठाया था, जैसे रोटी, रोजगार और शिक्षा। हालांकि, आज की योजनाओं में गांवों और गरीबों को प्राथमिकता नहीं दी गई, और विकास केवल कुछ खास वर्गों तक सीमित रह गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि शिक्षा प्रणाली कमजोर है और यह समाज के भविष्य को प्रभावित कर रही है। गांधीजी ने शिक्षा को एक ऐसा साधन माना था जो युवाओं को उत्पादक बना सके, लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, पाठ में यह चिंता व्यक्त की गई है कि लोकतंत्र और समाज में असमानता बढ़ रही है, और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। अंत में, यह कहा गया है कि गांधीजी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उनके सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है ताकि समाज में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सके।
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