दो शब्द :

पाठ का सारांश यह है कि मनुष्य के पास अक्षय शक्तियों का भंडार है, लेकिन बाहरी परिस्थितियों के कारण ये शक्तियाँ निष्क्रिय हो जाती हैं। इन्हें जागृत करने और सत्कर्म में प्रेरित करने का मुख्य साधन मंत्र है। लेख में मंत्र शक्ति, इसकी उपयोगिता, उपासना के प्रकार और वास्तविकता को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। लेखक ने "मन्त्र-शक्ति" नामक पुस्तक में मंत्र शास्त्र के सभी पहलुओं का व्यवस्थित परिचय और प्रयोग प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक आसानी से मंत्र शक्ति प्राप्त कर सके। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य उन व्यक्तियों को मदद करना है जो आज के व्यस्त जीवन में कुछ समय शांति से ईश्वर का स्मरण करना चाहते हैं। लेखक ने यह भी बताया है कि सुख की प्राप्ति केवल गुरु की कृपा से संभव है और गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और शिव का रूप माना गया है। गुरु की कृपा से ही जन्म-मरण के बंधनों का नाश होता है और सभी इच्छाओं की सिद्धि होती है। साथ ही, पाठ में विभिन्न प्रकार के मंत्रों, उनके उपयोग, और साधना के उपायों का भी उल्लेख किया गया है, जो मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति, और अन्य प्रकार के सुखों की प्राप्ति में सहायक होते हैं। इस प्रकार, लेखक ने मंत्रों की महत्ता और उनके सही उपयोग के लिए एक मार्गदर्शिका प्रस्तुत की है।


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