मुर्ख मंडली | Murkh Mandali

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति
- लेखक: पं रूपनारायण पाण्डेय - Pt Roopnarayan Pandey
- पृष्ठ : 116
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1922
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह पाठ हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार द्विजेंद्रनाथ राय के प्रहसन "अ्यहस्पर्श" पर आधारित एक नाटक का परिचय है। इसमें विभिन्न पात्रों का उल्लेख किया गया है, जैसे राजा विजयसिंह, उनके पुत्र गोपालसिंह, और डॉक्टर भगवतीप्रसाद। नाटक का पहला दृश्य भगवतीप्रसाद के बैठकखाने में होता है, जहाँ विभिन्न पात्र आपस में बातचीत कर रहे हैं। पात्रों के बीच बातचीत में राजा विजयसिंह की मूर्खता और उनके खानदान के बारे में चर्चा होती है। भगवतीप्रसाद, जो कि एक डॉक्टर हैं, अपने ज्ञान और इलाज की कला का प्रदर्शन करते हैं। गोपालसिंह का ब्याह करने का इरादा है, और इस विषय पर चर्चा होती है। अन्य पात्र मजाक करते हुए गोपाल के ब्याह को एक गंभीर विषय मानते हैं और एक उपयुक्त कन्या की तलाश की बात करते हैं। नाटक में हास्य और व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक और पारिवारिक मुद्दों को उजागर किया गया है। पात्रों की बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि समाज में विवाह और परिवार की अवधारणाएँ किस प्रकार से महत्वपूर्ण हैं, और साथ ही यह भी कि कैसे लोग एक-दूसरे के बारे में राय बनाते हैं। इस प्रकार, यह नाटक न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह सामाजिक व्यवहार और संबंधों पर भी प्रकाश डालता है।
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