आज़ाद हिन्द फ़ौज | Azad Hind Fauj

By: रामशंकर त्रिपाठी - Ramashankar Tripathi
आज़ाद हिन्द फ़ौज | Azad Hind Fauj by


दो शब्द :

इस पाठ में भारत की स्वतंत्रता संग्राम की कहानी को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें विशेष रूप से आजाद हिंद फौज और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 1847 में स्वतंत्रता की पहली कोशिश के बाद, 1884 से शांति के प्रयासों के साथ देशवासियों ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आजाद हिंद फौज का गठन किया और 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार की स्थापना की। पाठ में यह बताया गया है कि आजाद हिंद फौज में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोग शामिल थे, जो साम्प्रदायिक एकता का प्रतीक था। नेताजी ने इस फौज में हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई और पारसी सभी को एकत्र किया। पाठ में एक ऐग्लो-इंडियन बटालियन का भी उल्लेख है, जिसमें अंग्रेजी मूल के सैनिक थे, जो भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए लड़ने आए थे। इसके साथ ही, पाठ में यह भी बताया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आजाद हिंद फौज के सैनिकों को बचाने के लिए प्रयास किए, जबकि सरकार ने उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई की योजना बनाई। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई प्रमुख राजनीतिक नेता आजाद हिंद फौज के प्रति सहानुभूति दिखा रहे थे और इसे स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान मानते थे। इस प्रकार, पाठ में स्वतंत्रता संग्राम की जटिलताओं, साम्प्रदायिक एकता और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रेरणा को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *