रीति काव्य संग्रह | Riti Kavya Sangrah

- श्रेणी: भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: डॉ जगदीश गुप्त - Dr. Jagdeesh Gupt
- पृष्ठ : 480
- साइज: 123 MB
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में डॉ. जगदीश गुप्त द्वारा प्रस्तुत "रीति-काव्य-संग्रह" की भूमिका का वर्णन किया गया है। लेखक ने अपने काव्य-संकलन के उद्भव और उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया है कि इस संग्रह को उन्होंने अपनी सहज अभिरुचि और अपने गुरु डॉ. धीरेन्द्र वर्मा की प्रेरणा से वर्षों पहले प्रस्तुत किया था। उनके प्रयासों की सराहना की गई है और इसे विभिन्न विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। लेखक ने रीतिकाव्य की कला और सौंदर्य का महत्व बताते हुए कहा है कि यह केवल रूढ़िवादी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि काव्य के कलात्मक सौंदर्य के आधार पर भी देखा जा सकता है। उन्होंने ब्रजभाषा-काव्य के प्रति अपने प्रेम और उसके अध्ययन का उल्लेख किया है, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। इस संग्रह में रीतिकाव्य की परंपरा, उसके विकास, और उसके शास्त्रीय प्रकृति का अध्ययन किया गया है। लेखक ने यह भी बताया है कि संग्रह में कुछ अप्रसिद्ध कवियों के छंदों का चयन किया गया है, जो पाठकों को रोचक लगेगा। डॉ. गुप्त ने अपने सहयोगियों और शिक्षकों का आभार भी व्यक्त किया है, जिन्होंने इस संग्रह के निर्माण में सहायता की। अंततः, लेखक ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि सुधी पाठक इस संग्रह का स्वागत करेंगे और इससे उन्हें संतोष प्राप्त होगा।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.