नवीन मनोविज्ञान | Naveen Manovigyan

- श्रेणी: मनोवैज्ञानिक / Psychological मानसिक शक्ति/ Mansik Shakti
- लेखक: मधुकर - Madhukar
- पृष्ठ : 230
- साइज: 21 MB
- वर्ष: 1954
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने मनोविज्ञान के अध्ययन को एक नई दृष्टि से प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया है कि हिंदी में मनोविज्ञान की कई पुस्तकें हैं, लेकिन वे अक्सर शारीरिक और सामाजिक विज्ञान के आधार पर मनोविज्ञान की व्याख्या नहीं करतीं, जिससे विषय की असंगतता पैदा होती है। इस पुस्तक में नवीनतम ग्रैगात्मक खोजों के आधार पर मनोविज्ञान को शरीर-विज्ञान और समाज-विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में समझाने का प्रयास किया गया है। लेखक ने उन निरर्थक बातों से बचने का प्रयास किया है जो अन्य पुस्तकों में मिलती हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने कल्पना और आदतों पर अलग अध्याय लिखने के बजाय, इन्हें एक साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने मानसिक क्रियाओं को समझाने के लिए हिंदी में क्रिया वाचक शब्दों का प्रयोग किया है, जिससे विषय को समझना आसान हो सके। पुस्तक में व्यवहार के अध्ययन के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है, जैसे प्राणी और पर्यावरण, उत्तेजना और प्रतिक्रिया, मनोविज्ञान की परिभाषा, शरीर की रचना, संज्ञान, भावनाएँ, सीखना और याद रखना, व्यक्तित्व आदि। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यवहार का अध्ययन शारीरिक, सामाजिक और नैतिक संदर्भ में किया जा सकता है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य मनोविज्ञान के अध्ययन को एक समग्र दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक विभिन्न मानसिक क्रियाओं के अंतर्संबंध को बेहतर तरीके से समझ सकें। लेखक ने अपने विद्यार्थियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है जिनकी सहायता से उन्होंने यह पुस्तक लिखी है।
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